मूल अधिकार

मूल अधिकार भारत के सविधान के तीसरे भाग में वर्णित भारतीय नागरिको को प्रदान वो अधिकार है जो सामान्य स्थिति में सरकार द्वारा इसे सिमित नहीं किया जा सकता है और मूल अधिकार की सुरक्षा का प्रहरी सर्वोच्च न्यायलय है I ये मूल अधिकार अधिकार सभी भारतीय नागरिको को स्वतंत्रता प्रदान करता है I

मूल सविधान में सात मौलिक अधिकार थे लेकिन 44 वे सविधान संसोधन 1979 ई. के द्वारा सम्पति के अधिकार को हटाकर अनुच्छेद 300 (a) के अंतर्गत क़ानूनी अधिकार में रखा गया है I वर्तमान में छ: ही मौलिक अधिकार हैं I सविधान के भाग 3 में अनुच्छेद 12 से 35 तक मौलिक अधिकार के बारे में बताया गया जिसे संयुक्त राज्य अमेरिका के सविधान से लिया गया है I

1- समानता का अधिकार:

अनुच्छेद 14: राज्य ( देश) के सभी व्येक्तियों के लिए एक सामान कानून बनयेगा तथा सामान ढंग उन्हें लागु करेगा

अनुच्छेद 15: धर्म ,नस्ल, जाति, लिंगया जन्म के स्थान के आधार पर भेद-भाव नहीं किया जा सकता है I

अनुच्छेद 16: लोक नियोजन के अवसर की समानता I राज्य (देश ) के अधीन किसी पद पर नियोजन या नियुक्ति से सम्बंधित विषयो में सभी नागरिको के लिए अवसर की समानता होगी. इसमें अपवाद है – अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग .

अनुच्छेद17: अस्पृश्यता का अंत – अस्पृश्यता के उन्मूलन के लिए इससे दंडनीय अपराध घोषित किया गया है I

अनुच्छेद 18: उपाधियों का अंत – सेना या विधा सम्बन्धी सम्मान के सिवाए अन्य कोई भी उपाधि राज्य द्वारा प्रदान नहीं की जाएगी I भारत का कोई भी नागरिक किसी अन्य देश से बिना राष्ट्रपति की आज्ञा के कोई उपाधि नहीं कर सकता है I

2- स्वतंत्रता का अधिकार :

अनुच्छेद 19: मूल सविधान में 7 तरह के स्वतंत्रता का उल्लेख था अब वर्तमान में 6 है I

19(a)- बोलने का स्वतंत्रता

19 (b)- शांतिपूर्वक (बिना हथियारो) कोई भी सभा या मीटिंग की स्वतंत्रता

19(c)- संघ बनाने की सवतंत्रता

19(d)- देश के किसी भी क्षेत्र में आने- जाने की स्वतंत्रता

19(e)- देश के किसी भी क्षेत्र में निवास करने या बसने की स्वतंत्रता

19(f)- संपत्ति का अधिकार (इसे हटा दिया गया है और कानून के अधिकार के अंतर्गत कर दिया गया है)

19(g)- कोई भी व्यापर एवं जीविका चलने की स्वतंत्रता

अनुच्छेद 20 : अपराधो के लिए दोष- सिद्धि के संबंध में संरक्षण – इसके तहत 3 प्रकार की स्वतंत्रता का वर्णन हैं I

(a)- किसी भी व्यक्ति को एक अपराध के लिए सिर्फ एक बार ही सजा मिलेगी

(b)- अपराध करने के समय जो कानून है उसी के तहत सजा मिलेगी न की पहले और बाद में बनने वाले कानून के तहत

(c)- किसी भी व्यक्ति को स्वयं के विरुद्ध न्यायलय में गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जायेगा

3- अनुच्छेद 21: प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण : किसी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अतिरिक्त उसके व्यक्तिव की स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है I

4- अनुच्छेद 21(क): राज्य 6 से 14 वर्ष के आयु के समस्त बच्चो को नि:शुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराएगा (86 वा संशोधन 2002 के द्वारा).

5- अनुच्छेद 22: कुछ दशाओ में गिरफ्तारी और निरोध में संरक्षण : अगर किसी भी व्यक्ति को मनमाने ढंग से हिरासत में ले लिया गया हो , तो उसे तीन प्रकार की स्वतंत्रता प्रदान की गई है –

(1) हिरासत में लेने का कारण बताना होगा

(2) 24 घंटे के (आने जाने के समय को छोड़कर) उसे दंडाधिकारी के समक्ष पेश किया जायेगा

(3) उसे अपने पसंद के वकील से सलाह लेने का अधिकार होगा

3- शोषण के विरुद्ध अधिकार :

अनुच्छेद 23: मानव के दुर्व्यापार और बाल श्रम के विरुद्ध अधिकार: इसके द्वारा किसी व्यक्ति की खरीद-बिक्री, बेगारी तथा इसी प्रकार अन्य जबरदस्ती से लिया हुआ श्रम निषिध्द ठहराया गया है, जिसका उल्लंघन विधि के अनुसार दंडनीय अपराध है.

नोट: जरुरत पढ़ने पर राष्ट्रीय सेवा करने के लिए बाध्य किया जा सकता है.

अनुच्छेद 24: बालको के नियोजन का प्रतिषेद: 14 वर्ष से कम आयु वाले किसी बच्चे को कारखानों, या अन्य किसी जोखिम भरे काम पर नियक्त नहीं किया जा सकता है I

4- धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार :

अनुच्छेद 25: कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म को मान सकता है और उसका प्रचार-प्रसार कर सकता है

अनुच्छेद 26: धर्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता: व्यक्ति को अपने धर्म के लिए संथाओ की स्थापना व पोषण करने, विधि-सम्मत सम्पति के अर्जन, स्वामित्व व प्रशासन का अधिकार है.

अनुच्छेद 27: राज्य किसी भी व्यक्ति को ऐसे कर देने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है, जिसकी आय किसी विशेष धर्म अथवा धार्मिक संप्रदाय की उन्नति या पोषण में व्यय करने के लिए विशेष रूप से निश्चित कर दी गई है

अनुच्छेद 28 : राज्य विधि से पूर्णत: पोषित किसी शिक्षा संस्था में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी. ऐसे शिक्षण संस्थान अपने विद्यार्थियों को किसी धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने या किसी धर्मौपदेश को बोलने सुनने हेतु बाध्य नहीं कर सकता

5- संस्कृति एवं शिक्षा संबंधित अधिकार :

अनुच्छेद 29 : अल्पसंख्यक हितो का संरक्षण: कोई अल्पसंख्यक वर्ग अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को सुरक्षित रख सकता है और केवल भाषा, जाति, धर्म और संस्कृति के आधार पर उसे किसी भी सरकारी शैक्षिक संस्था में प्रवेश से नहीं रोका जायेगा I

अनुच्छेद 30 : शिक्षा संस्थाओ की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार: कोई भी अल्पसंख्यक वर्ग अपनी पसंद की शैक्षिणिक संस्था चला सकता है और सरकार उसे अनुदान देने में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करेगी

6- संवैधानिक उपचारों का अधिकार : (इसे डॉ. भीमराव आंबेडकर ने सविधान की आत्मा कहा है )

अनुच्छेद 32: इसके तहत मौलिक अधिकारों को प्रवर्तित करने के लिए समुचित कार्यवाहियो द्वारा उच्चतम न्यायलय में आवेदन करने का अधिकार प्रदान किया गया है I

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